Government Of Rajasthan

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Directorate of Economics & Statistics
Rajasthan Agriculture Statistics

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About Jeanswar
जिन्सवार-
कृषि वर्ष के मौसम खरीफ, रबी एवं जायद रबी में राजस्व विभाग द्वारा गिरदावरी के आधार पर राज्य में बोई गई खाद्य तथा अखाद्य फसलों का बोया गया सिंचित एवं असिंचित क्षेत्रफल एवं उत्पादन के समंक दर्षायें जाते हैं।
मिलान खसरा-
मिलान खसरा के अन्तर्गत जिले के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का नव स्तरीय वर्गीकरण यथा जंगलात, कृषि अयोग्य, जोत रहित भूमि, पड़त भूमि व समस्त बोया गया क्षेत्रफल, दुपज क्षेत्रफल तथा वास्तविक सिंचित क्षेत्रफल सम्बन्धी तहसीलवार सूचना का इन्द्राज किया जाता है।
पूरक मिलान खसरा-
पूरक मिलान खसरा के अन्तर्गत खेती के लिए उपलब्ध सिंचाई के संसाधनों यथा तालाब, नलकूप, कुओं आदि की संख्या का विवरण उपलब्ध करवाया जाता है।
फसल काटते समय के भाव-
कृषि वर्ष में मौसम खरीफ एवं रबी की प्रमुख फसलों के फसल कटते समय के भाव तैयार किये जाते है।
कृषि अंकतालिका-
कृषि अंकतालिका की सूचना जिसंवार, मिलान खसरा एवं पूरक मिलान खसरा के आधार पर तैयार की जाती है। कृषि अंकतालिका में कुल भौगोलिक क्षेत्रफल, सिचिंत क्षेत्रफल (साधनवार) की सूचना, विभिन्न फसलों के कुल बोये हुये क्षेत्रफल तथा सिचिंत क्षेत्रफल की सूचनाओं का इन्द्राज किया जाता है।
About RainFall
वर्षा समंक--
राज्य के वर्षा मापक केन्द्रों से प्राप्त सूचना के आधार पर वर्षा के समंको का संकलन किया जाता है।
About Wages
कृषि एवं ग्रामीण मजदूरी समंक
राजस्थान के प्रत्येक जिले के दों-दों चयनित ग्रामों यथा कुल 66 ग्रामों की सूचना के आधार पर कृषि एवं ग्रामीण मजदूरी समंक तैयार किये जाते हैं। समंक प्रतिदिन कार्य के 8 घंटे के दौरान प्रचलित मजदूरी दरों यथा नकद/वस्तु सुविधा के रूप में लिंगवार संकलित किये जाते है। मजदूरी समंक निम्नांकित कृषि एवं ग्रामीण कार्यों से संबंधित है- 1. मुख्य कार्यः-जुताई, बुवाई, पौध लगाना, निराई, सिंचाई, पानत करना, कपास चुनना, कटाई करना, बरसाना, गाठा करना। 2. गौण कार्यः-कुएं खोदना, मैड़ बन्दी करना, खेत की नालियां साफ करना। 3. सहायक कार्यः-बढई, लुहार, मोची, नाई, कारीगर, दर्जी, चरवाहा।
About ICS
फसल सांख्यिकी सुधार योजना (आई.सी.एस.)
फसल सांख्यिकी सुधार योजना केन्द्र प्रवर्तित योजना है। राज्य में यह योजना 1973-74 के रबी मौसम से लागू की गई है। इस योजना का मुख्य उद्धेष्य केन्द्रीय एवं राज्य सरकार के प्राधिकारियों के संयुक्त प्रयासों से राज्य क्षेत्र में फसल सांख्यिकी संग्रहण प्रणालियों की कमियों का पता लगाने के साथ-साथ इन्हें दूर करने के लिए सुधारात्मक उपायों का सुझाव देना भी है। इस योजना के दों भाग हैं।
1. क्षेत्रफल परिगणना- इसके अन्तर्गत राजस्व कर्मचारी द्वारा तैयार किये गये कृषि क्षेत्रफल समंकों की सत्यता की जानकारी मौके पर सुनिष्चित करने हेतु राज्य एवं केन्द्रीय कर्मियों (एन.एस.एस.ओ.) द्वारा 300-300 ग्रामों में क्षेत्रफल परिगणना एवं खसरा पंजिका के पृष्ठवार एवं फसलवार योगों की प्रतिदर्ष जाँच की जाती है। क्षेत्रफल परिगणना की प्रतिदर्ष जाँच हेतु प्रत्येक प्रतिदर्ष ग्राम में पर्यवेक्षण के लिए चार समुच्चय होते हैं। जिनमें प्रत्येक समुच्चय में पाँच खसरा नम्बर होते हैं। इस प्रकार कुल बीस खसरा नम्बरों का चयन प्रत्येक प्रतिदर्ष ग्राम में से किया जाता है। यह चयन सर्कुलर सिस्टेमेटिक सेम्पलिंग पद्धति से किया जाता है। पर्यवेक्षक इन चयनित खसरा नम्बरों में निम्न तथ्यों का मौके पर सत्यापन करता है-
।. बोयी गयी फसल की पहचान,
।।. फसल के अन्तर्गत दर्षाया गया क्षेत्रफल,
।।।. सिंचाई की स्थिति,
।।।।. उन्नत किस्म के बीजों के अन्तर्गत क्षेत्रफल।
2. फसल कटाई प्रयोग(H.S.I.)- फसल सांख्यिकी सुधार योजनान्तर्गत फसल कटाई प्रयोग में आवंटित फसल कटाई प्रयोगों का शत-प्रतिषत निरीक्षण जिला सांख्यिकी कार्यालय के सांख्यिकी कर्मचारियों एवं एन.एस.एस.ओ. के कर्मचारियों द्वारा किया जाता है। इसके अन्तर्गत अनुसूची 2.0 प्रयोग में ली जाती है। इसके अन्तर्गत मौसम खरीफ में 520-520 एवं मौसम रबी में 420-420 प्रयोगों का पर्यवेक्षण किया जाता है। इसमें पर्यवेक्षक द्वारा निरीक्षण कटाई स्तर पर ही किया जाता है। चयनित खसरा नम्बर में चुने हुए खेत में फसल कटाई प्रयोग हेतु 5X5 मीटर (कपास हेतु 10X5 मीटर) का प्लॉट निर्धारित होता है।

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